🚩‼️ओ३म्‼️🚩 | 🕉️🙏नमस्ते जी | दिनांक - ०३ अप्रैल २०२६ ईस्वी | दिन - - शुक्रवार
- kcptokyomarathon20
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🚩‼️ओ३म्‼️🚩
🕉️🙏नमस्ते जी
दिनांक - ०३ अप्रैल २०२६ ईस्वी
दिन - - शुक्रवार
🌖 तिथि -- प्रतिपदा ( ८:४२ तक तत्पश्चात द्वितीया )
🪐 नक्षत्र - चित्रा ( १७:२५ तक तत्पश्चात स्वाति )
पक्ष - - कृष्ण
मास - - वैशाख
ऋतु - - बसंत
सूर्य - - उत्तरायण )
🌞 सूर्योदय - - प्रातः ६:०९ पर दिल्ली में
🌞 सूर्यास्त - - सायं १८:४० पर
🌖 चन्द्रोदय -- २०:०४ पर
🌖 चन्द्रास्त - - ६:२७ पर
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२७
कलयुगाब्द - - ५१२७
विक्रम संवत् - -२०८३
शक संवत् - - १९४८
दयानंदाब्द - २०२
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🚩‼️ओ३म्‼️🚩
🔥यज्ञोपैथी
( हवन से रोग निवारण )
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प्रश्न :- क्या हवन के माध्यम से बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है?
उत्तर :- हाँ ! हवन में विशेष प्रकार के पदार्थों की आहुति देने से कई प्रकार के रोग नष्ट होते हैं, इसे आधुनिक विज्ञान की भाषा में यज्ञ चिकित्सा कहते हैं। विश्व के कई देशों में रोगों को दूर करने के लिए यज्ञ चिकित्सा का प्रचलन बढ़ रहा है।
टाइफाईड
*नीम, चिरायता, पितपापडा, त्रिफला सम्भाग शुद्ध गौ घृत मिश्रित आहुति दें।
ज्वरनाशक
अजवाइन की आहुति हवन में दें।
नजला, जुकाम, सिरदर्द
मुनक्का की आहुति हवन में दें।
नेत्रज्योति वर्धक
शहद की आहुति हवन में दें।
मस्तिष्क बलवर्धक
शहद व सफ़ेद चन्दन की आहुति दें।
वातरोग नाशक
पिप्पली की आहुति दें।
मनोविकार नाशक
गुग्गल और अपामार्ग की आहुति दें।
मानसिक उन्माद नाशक
सीताफल के बीज एवं जटामासी चूर्ण की आहुति दें।
पीलिया नाशक
देवदारु, चिरायत, नागरमोथा, कुटकी और वायविडग्ग की आहुति दें।
मधुमेह नाशक
गुग्गल, लोभान, जामुन के वृक्ष की छाल और करेला के डंठल संभाग की आहुति दें।
चित्त भ्रम नाशक
कचूर, खस, नागरमोथा महुआ, सफ़ेद चन्दन, गुग्गल, अगर, बड़ी इलायची, नरवी और शहद की आहुति दें।
क्षय नाशक
गुग्गल, सफ़ेद चन्दन, गिलोय बांसा का चूर्ण और कपूर की आहुति दें।
मलेरिया नाशक
गुग्गल, लोभान, कपूर, कचूर, हल्दी, दारुहल्दी, अगर, वायविडग्ग, जटामासी, वच, देवदारु, कठु, अजवाइन, नीम पत्ते, समभागचूर्ण, की आहुति दें।
सर्वरोग नाशिनी
गुग्गल, वच, गंध, नीम पत्ते, आक पत्ते, अगर, राल, देवदारु, छिलका सहित मसूर की आहुति दें।
जोड़ों का दर्द
निर्गुन्डी के पत्ते, गुग्गल, सफ़ेद सरसों, नीम पत्ते और राल संभाग चूर्ण की आहुति दें।
निमोनिया नाशक
पोहकर मूल, वच, लोभान, गुग्गल और अडूसा संभाग चूर्ण की आहुति दें।
जुकाम नाशक
खुरासानी अजवाइन, जटामासी, पशमीना कागज, लाल बूरा और संभाग चूर्ण की आहुति दें।
पीनस
बरगद पत्ते, तुलसी पत्ते, नीम पत्ते, वायविडग्ग, सहजने की छाल संभाग चूर्ण में धूप का चूरा मिलाकर आहुति दें।
कफ नाशक
बरगद पत्ते, तुलसी पत्ते, वच, पोहकर मूल, अडूसा पत्र सम्भाग चूर्ण की आहुति दें।
सिर दर्द नाशक
काले तिल और वायविडग्ग चूर्ण की आहुति दें।
चेचक
खसरा नाशक – गुग्गल, लोभान, नीम पत्ते, गंधक, कपूर, काले तिल और वायविडग्ग चूर्ण की आहुति दें।
जिव्हा तालू रोग नाशक
मुलहटी, देवदारु, गंधाविरोजा, राल, गुग्गल, पीपल, कुलंजन, कपूर और लोभान की आहुति दें।
कैंसर नाशक
गूलर फूल, अशोक छाल, अर्जन छाल, लोध्र, माजूफल, दारुहल्दी, हल्दी, खोपरा, तिल, जौ चिकनी सुपारी, शतावर, काकजंघा, मोचरस, खस, मंजीष्ठ, अनारदाना, सफ़ेद चन्दन, लाल चन्दन, गंधा, विरोजा, नरवी, जामुन पत्ते, धाय के पत्ते सम्भाग चूर्ण में दस गुना शक्कर औ एक गुना केसर से दिन में तीन बार हवन करें।
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🚩‼️ आज का वेद मंत्र ‼️🚩
🔥 सहस्रशीर्षा पुरुष: सहस्राक्ष: सहस्रपात।
स भूमिं सर्वत स्पृत्वात्यतिष्ठद्दशाड्गुलम्।। ( यजुर्वेद 31/1 )
🌷 हे मनुष्यों ! जिस पूर्ण परमात्मा में हम मनुष्य आदि प्राणियों के असंख्य शिर , असंख्य आँख और असंख्य पाँव आदि विधमान है ; जो भूमि आदि पाँच स्थूल और पाँच सूक्ष्म भूतों से से युक्त जगत् को अपनी सत्ता से पूर्ण करके ; जहाँ जगत नही है , वहाँ भी पूर्ण हो रहा है ; उस सब के निर्माता , परिपूर्ण , सच्चिदानन्दस्वरूप , नित्यशुद्वबुद्वमुक्त-स्वभाव वाले परमेश्वर को छोड़कर अन्य की उपासना तुम कभी न करो ; किन्तु इसकी उपासना से धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष को प्राप्त करो ।
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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
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🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏
(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮
ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे
कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- एकशत सप्तविंशति:( १,९६,०८,५३,१२७ ) सृष्ट्यब्दे】【 द्विसहस्रत्र्यशीतितम: ( २०८३) वैक्रमाब्दे 】 【 द्वियधिकद्विशतम् ( २०२) दयानन्दाब्दे, सिद्धार्थ -संवत्सरे, रवि- उत्तरायणे , बंसत -ऋतौ, वैशाख - मासे, कृष्ण - पक्षे , प्रतिपदायां
तिथौ, चित्रा नक्षत्रे, शुक्रवासरे
, शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर भगते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे
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