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भारतीय इतिहास के साथ एक सुनियोजित खिलवाड़
भारतीय इतिहास के साथ एक सुनियोजित खिलवाड़ (6 जून 1674 को वीर छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ था। शिवाजी के सिंघासन आरोहण का प्रभाव अगली एक शताब्दी तक हम पूरे भारत में देखते है जब मराठा शक्ति पूरे भारत पर छा गई। आज शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के उपलक्ष में यह ऐतिहासिक लेख प्रकाशित किया जा रहा हैं। -डॉ विवेक आर्य) भारतीय इतिहास की पाठय पुस्तकों में औरंगजेब और शिवाजी के संघर्ष के पश्चात चुनिन्दा घटनाओं को ही प्राथमिकता से बताया जाता हैं जैसे की नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली द्
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2 days ago13 min read


Jai Japan #15 - Will the Japanese yen become even weaker?
Written and shared by Mia Horiguchi San “Will the Japanese yen become even weaker?” Recently, I hear this question more and more from both Japanese people and foreigners living in Japan. Honestly, nobody really knows what will happen next. But one thing many people can feel already is this: Life in Japan is getting more expensive. Food prices are going up. Electricity bills are higher. Imported products cost more. Even eating simple meals outside is not as cheap as before. F
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May 293 min read


Jai Japan - #14 - The Chinese Tourist Debate.
Written and shared by Mia Horiguchi San I recently saw news about a restaurant in Osaka reportedly banning all Chinese customers because of “bad manners.” The story spread quickly online, and as expected, many people immediately took sides. Some supported the restaurant completely. Others called it discrimination. Personally, I can understand why emotions are high on both sides. Japan is experiencing massive tourism growth right now. Popular areas like Osaka, Kyoto, and Tokyo
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May 123 min read


कार्ल मार्क्स और धर्म
5 मई को कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। अनेक कम्युनिस्ट धर्म को अफीम कह रहे थे। इस लेख से जानिए कि क्या धर्म अफीम है? नहीं। तो फिर अफीम क्या है? Written and shared by #डॉ_विवेक_आर्य कार्ल मार्क्स के वचन पढ़िए 1.) Religion is the opium of the masses अर्थात रिलिजन लोगों का अफीम है ! 2.) The first requisite for the happiness of the people is the abolition of religion अर्थात लोगों की ख़ुशी के लिए पहली आवश्यकता रिलिजन का अंत है ! तथा 3.) Religion is the impotence of the human mind to
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May 54 min read


5.5.2026
कुछ लोग अपनी योजनाएं बनाते हैं, कि मुझे यह कार्य करना है। "फिर उसके लिए पुरुषार्थ भी करते हैं। उनकी अनेक योजनाएं सफल भी हो जाती हैं।" धीरे-धीरे उनकी आयु बढ़ने लगती है, और 60/65 तक पहुंच जाती है। वे फिर और योजनाएं बनाते हैं। फिर काम करते हैं और उन्हें सफलताएं भी मिलती जाती हैं। फिर कभी-कभी ऐसा भी सोचते हैं, "अब तो मेरी आयु बहुत बढ़ गई। अब क्या योजना बनाएंगे!" परन्तु जो लोग अभी भी काम करने में सक्षम हैं, समर्थ हैं। उनके शरीर में अभी शक्ति है और उनके पास योजना
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May 52 min read


इतिहास के 2 महानायक जिन्होंने हिन्दवी साम्राज्य का स्वप्न देखा।
इतिहास के 2 महानायक जिन्होंने हिन्दवी साम्राज्य का स्वप्न देखा। इनके विषय में स्वयं पढ़िए व दूसरों को बताएं। दोनों पुस्तक शोध करके लिखी गई है। 1- शिवाजी महाराज द ग्रेटेस्ट। मूल्य ₹600 2- संभाजी महाराज। मूल्य ₹700 दोनों पुस्तक विशेष छूट के साथ। केवल ₹800 (डाक खर्च सहित)। मंगवाने के लिए +91-88001-17083 पर वट्सएप करें।
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May 51 min read


🔥अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस🔥 दिनांक 3 मई 2026 रविवार
नमस्ते जी, 🔥अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस🔥 दिनांक 3 मई 2026 रविवार के उपलक्ष्य में 🔥🔥 घर-घर यज्ञ🔥🔥 🔥🔥 हर घर यज्ञ 🔥🔥 अभियान के अंतर्गत आइए, जूम के माध्यम से जुड़कर प्रत्येक घर में यज्ञ करें । यज्ञ - प्रातः 6:45 बजे से 7:45 बजे तक यज्ञ ब्रह्मा - आचार्य विवेक दीक्षित जी आशीर्वाद - प्रातः 7:45 बजे से 8:00 तक द्वारा - पूज्यपाद स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक ( निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात)
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May 31 min read


🚩‼️ओ३म्‼️🚩 | 🕉️🙏नमस्ते जी | दिनांक - ०२ मई २०२६ ईस्वी | दिन - - शनिवार
🚩‼️ओ३म्‼️🚩 🕉️🙏नमस्ते जी दिनांक - ०२ मई २०२६ ईस्वी दिन - - शनिवार 🌖 तिथि-- प्रतिपदा ( २४:५९ तक तत्पश्चात द्वितीया ) 🪐 नक्षत्र -- विशाखा (पूर्ण रात्री तक ) पक्ष - - कृष्ण मास - - ज्येष्ठ ऋतु - - ग्रीष्म सूर्य - - उत्तरायण ) 🌞 सूर्योदय - - प्रातः ५:४० पर दिल्ली में 🌞 सूर्यास्त - - सायं १८:५७ पर 🌖 चन्द्रोदय -- १९:५० पर 🌖 चन्द्रास्त - - चन्द्रास्त नही होगा सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२७ कलयुगाब्द - - ५१२७ विक्रम संवत् - -२०८३ शक संवत् - - १९४८
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May 33 min read


3.5.2026 - Today's Thought
3.5.2026 ईश्वर दयालु है। ईश्वर के इस दयालुपन गुण को धारण करने वाले कुछ लोग भी दयालु होते हैं। वे सदा दूसरों की सहायता करने को तैयार रहते हैं। "कोई भी योग्य पात्र मिले, चाहे रोगी हो, विकलांग हो, निर्धन हो, कोई पशु पक्षी हो अथवा कोई अचानक आपत्ति में फंस हो गया हो, तो ऐसे लोगों की सहायता करने को वे दयालु लोग सदा तत्पर रहते हैं, और शीघ्र ही उनकी सहायता करते हैं। इससे उन आपत्तिग्रस्त लोगों की समस्याएं दूर हो जाती हैं, तथा उनका पूरा दिन आनंद से बीतता है।" "और दया
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May 31 min read
उपनिषद् ज्ञान गङ्गा - [भाग 3]
प्रस्तुति- प्रियांशु सेठ * अन्तिम उपदेश याज्ञवल्क्य की दो स्त्रियां थीं, मैत्रेयी और कात्यायनी। मैत्रेयी को ब्रह्म सम्बन्धी विचार में रुचि थी; कात्यायनी घर के काम काज में चतुर थी। याज्ञवल्क्य की इच्छा हुई कि वे गृहस्थ को छोड़कर अगले आश्रम में प्रवेश करें। याज्ञवल्क्य ने कहा, "मैत्रेयी! देखो, मैं चाहता हूं कि वर्तमान आश्रम को छोड़कर संन्यास ले लूं। अतएव मैं चाहता हूं कि अपनी सम्पत्ति तुम दोनों में बांट दूं।" मैत्रेयी ने कहा, "यदि सारा संसार समस्त सम्पत्ति समेत मेरा हो, तो क्या म
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May 34 min read
Savarkar, Shuddhi and Swami Dayanand
Savarkar, Shuddhi and Swami Dayanand Dr. Vivek Arya It was year 1913. Vinayak Savarkar, the great patriot was imprisoned in the Andaman Jail of Port Blair. Savarkar found a very strange pattern of discrimination in Jail. The higher officials in Jail were mainly British while the junior ranks were occupied mostly by Pathans from North West Frontier Province. It was usual for Muslim Pathans to use abusive language for Hindu prisoners because they consider them as Kafirs. They
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Apr 263 min read


कर्मफल के सिद्धान्तों को वेद, दर्शन, उपनिषद तथा मनुस्मृति आदि वेदानुकूल ग्रन्थों के आधार पर प्रतिपादित किया गया है।
कर्मफल के सिद्धान्तों को वेद, दर्शन, उपनिषद तथा मनुस्मृति आदि वेदानुकूल ग्रन्थों के आधार पर प्रतिपादित किया गया है। जीवात्मा विभिन्न योनियों में अपने कर्मफलों का भोग करता हुआ इस मानव देह में आया है जोकि एकमात्र कर्म योनि है और यहाँ वह नवीन कर्म करता है जिसके आधार पर उसे भोग और अपवर्ग दोनों की प्राप्ति होती है। अगर मानव देह में आकर भी जीव शुद्ध ज्ञान, शुद्ध कर्म और शुद्ध उपासना को न अपना सका तो उसका मानव देह में आना व्यर्थ हो जाता है। अतः शुद्ध ज्ञान, शुद्ध कर्म और शुद्ध उपासन
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Apr 261 min read
* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश •
* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश • ------------------------------------ येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृढा येन स्वः स्तभितं येन नाकः। योऽअन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ -- यजुर्वेद : अध्याय 32, मंत्र 6 अर्थ : (येन) जिस परमात्मा ने (उग्रा) तीक्ष्ण स्वभाव वाले (द्यौः) सूर्य आदि (च) और (पृथिवी) भूमि को (दृढा) धारण, (येन) जिस जगदीश्वर ने (स्वः) सुख को (स्तभितम्) धारण, और (येन) जिस ईश्वर ने (नाकः) दुःखरहित मोक्ष को धारण किया है, (यः) जो (अन्तरिक्षे) आक
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Apr 263 min read
डॉ अंबेडकर के मतानुसार वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मूलभूत अन्तर
डॉ अंबेडकर के मतानुसार वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मूलभूत अन्तर डॉ. अंबेडकर वर्ण व्यवस्था एवं जाति व्यवस्था को परस्पर विरोधी मानते हैं और वर्ण व्यवस्था के मूल तत्त्वों की प्रशंसा करते हैं। उन्हीं के शब्दों में उनके मत उद्धृत हैं- (क) ‘‘जाति का आधारभूत सिद्धान्त वर्ण के आधारभूत सिद्धान्त से मूल रूप से भिन्न है, न केवल मूल रूप से भिन्न है, बल्कि मूल रूप से परस्पर-विरोधी है। पहला सिद्धान्त (वर्ण) गुण पर आधारित है’’ (अंबेडकर वाङ्गमय, खंड 1, पृ. 81) (ख) वर्ण और जाति दोनों का
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Apr 262 min read


वैदिक संस्कृत के उपासक:महात्मा प्रेमभिक्षु जी
वैदिक संस्कृत के उपासक:महात्मा प्रेमभिक्षु जी #डॉ_विवेक_आर्य (25 अप्रैल पुण्यतिथि के अवसर पर प्रकाशित) निष्ठावान प्रचारक, कार्यकर्ता, लेखक वह पत्रकार श्री ईश्वारीप्रसाद प्रेम/ महात्मा प्रेमभिक्षु जी का जन्म मथुरा के दरवै (देवनगर) में श्रवण कृष्णा 9 सम्वत 1981 विक्रमी को हुआ था। आपके पिता श्री पुरुषोत्तमदास जी निष्ठावान आर्यसमाजी थे। आपने ऍम.ए, साहित्यरत्न तथा सिद्धांत शास्त्री तक शिक्षा प्राप्त की थी। आप बालकाल से ही आर्यसमाज मथुरा में जाने लगे। 1942 में आप आर्यसमाज तिलकद्वार
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Apr 262 min read
लेख आर्यमित्र १२ फ़रवरी
लेख आर्यमित्र १२ फ़रवरी सौ करोड़ से इकला भारी महर्षि दयानन्द के समय भारतवर्ष का जितना क्षेत्रफल था, उसमें भारतीय संस्कृति के अनुयायियों की वर्त्तमान संख्या सौ करोड़ से अधिक है। किन्तु हम सब लोग मिलकर भी मानव कल्याण के इतने प्रयास नहीं कर पा रहे हैं, जितने महर्षि दयानन्द ने अकेले कर लिये थे। इस दृष्टि से महर्षि दयानन्द अकेले ही सौ करोड़ मनुष्यों से अधिक भारी हैं। गुरु विरजानन्द दण्डी ने अपने शिष्य दयानन्द को मुख्य रूप से व्याकरण पढ़ायी थी, अर्थात् अष्टाध्या
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Apr 265 min read


सेक्युलरीज्म का दीमक -
सेक्युलरिज्म का दीमक भारत को खोखला कर है. इसके कारण विभाजन हुआ और कश्मीर की समस्या हमारे हिस्से में आई. यदि सरदार पटेल के हाथ में देश की बागडोर होती तो कश्मीर समस्या नहीं होती. इस समस्या के इतिहास और वर्तमान को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी पुस्तक. 1- सरदार पटेल, भारत विभाजन. ₹600 2- कश्मीर झूलसता स्वर्ग. ₹140 दोनों पुस्तक विशेष छूट के साथ केवल ₹500 ( डाक खर्च सहित) मंगवाने के लिए 094855 99275 पर वट्सएप द्वारा सम्पर्क करें. ------------------------- सरदार पटेल, भारत विभाजन--
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Apr 263 min read
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के अमूल्य उपदेश [भाग १]
प्रस्तुति- प्रियांशु सेठ १. जैसे शीत से आतुर पुरुष का अग्नि के पास जाने से शीत निवृत्त हो जाता है वैसे परमेश्वर के समीप प्राप्त होने से सब दोष दुःख छूटकर परमेश्वर के गुण कर्म स्वभाव के सदृश जीवात्मा के गुण कर्म स्वभाव पवित्र हो जाते हैं। (सत्यार्थप्रकाश समुल्लास ७) २. जो परमेश्वर की स्तुति, प्रार्थना और उपासना नहीं करता वह कृतघ्न और महामूर्ख भी होता है क्योंकि जिस परमात्मा ने इस जगत् के सब पदार्थ सुख के लिए दे रखे हैं उसके गुण भूल जाना ईश्वर ही को न मानना कृतघ्नता और मूर्खता
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Apr 262 min read
युवा मनीषी-पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी
संकलनकर्ता- #डॉ_विवेक_आर्य पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी की जयंती 26/4/1890 पर विशेष रूप से प्रकाशित पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी एक युवक दार्शनिक विद्वान् थे जिन्होंने चौबीस वर्ष (24) की अल्पायु में ही संस्कृत, अरबी, फ़ारसी, अंग्रेजी, वैदिक साहित्य, अष्टाध्यायी, भाषा विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, नक्षत्र विज्ञान, शरीर विद्या, आयुर्वेद, दर्शन शास्त्र, इतिहास, गणित आदि का जो समयक ज्ञान प्राप्त कर लिया था , उसे देख कर बड़े-बड़े विद्वान चकित रह जाते थे।उनके ज्ञान का अनुम
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Apr 267 min read
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