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हिन्दू के अस्तित्व पर पुनर्विचार -
हिन्दू के अस्तित्व पर पुनर्विचार - यह पुस्तकें आपको एक नया दृष्टिकोण देंगी. 1- हिन्दू जागरण- ₹125 2- हिंदुस्तान में हिन्दू का अस्तित्व 175 3- क्या हिन्दू मिट जाएगा ₹175 4- भीम मीम और बाबा साहेब ₹175 5- अम्बेडकर और इस्लामिकव कट्टरवाद ₹65 6- हिंदू संगठन ₹30 7- अंतिम हिन्दू ₹15 उपरोक्त 7 पुस्तक विशेष छूट के साथ ₹600 (डाक खर्च सहित) मंगवाने के लिए +91-88001-17083 पर वट्सएप करें.
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3 hours ago1 min read
🌷ईश्वर विषय में शंका समाधान🌷
🌷ईश्वर विषय में शंका समाधान🌷 🌻प्रश्न―कुछ लोग कहते हैं कि-ब्रह्मा, शिव देहधारी भी ईश्वर ही थे क्योंकि ब्रह्मा, शिव का कोई भी माता पिता न था। यदि वे ईश्वर न होते तो उनका भी कोई माता पिता अवश्य होता? *उत्तर:-*ऋषि ब्रह्मा,शिव का माता पिता भी ईश्वर ही था जैसे कि ऋषि अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा, भृगु, वशिष्ठ, गौतम, भारद्वाज, जमदग्नि आदि ऋषियों का माता पिता था।क्योंकि ऋषि ब्रह्मा, शिव भी अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा, भृगु, वशिष्ठ, गौतम, भारद्वाज, जमदग्नि की ही भांति आदि अमैथुनी ईश
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3 hours ago6 min read
आर्यसमाज का वेद-विषयक दृष्टिकोण
आर्यसमाज का वेद-विषयक दृष्टिकोण --------------------------------------------- 👉 वेदों की अपौरुषेयता, महत्व और श्री जवाहरलाल नेहरू की Discovery of India --------------------------------------------- -- ✍️पण्डित गंगाप्रसाद उपाध्याय श्रीयुत् पं० जवाहरलाल नेहरू जी ने अभी हाल में एक उत्तम पुस्तक लिखी है जिसका नाम है ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ (Discovery of India)। उसमें अनेक उत्तम-उत्तम बातों के अतिरिक्त आर्यसमाज और वेदों के विषय में दो उल्लेखनीय वाक्य हैं - 1. Many Hindus look upon
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3 hours ago11 min read
▪️ईसाइयों के त्यौहार Easter Sunday पर विशेष प्रस्तुति...
क्या ईस्टर के दिन यीशु का मृतोत्थान (resurrection) हुआ था? ◙ बाईबल में यीशु की एक भविष्यवाणी की समीक्षा... ------------------------------------------ भूमिका: बाईबल के पुराने करार (Old Testament) में योना (Jonah) नामक एक पुस्तक सम्मिलित है, जिसमें पैगम्बर योना की कहानी है। उसमें लिखा है कि एक दिन योना एक जलयान में यात्रा कर रहे थे। मार्ग में तूफान आने पर नाविकों ने योना को समुद्र में फेंक दिया। तब प्रभु के आदेश पर एक बडा मच्छ योना को निगल जाता है। योना "तीन दिन और तीन रात तक"
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3 hours ago5 min read


March 16 : World Peace Day!!
March 16 holds deep significance within the Soka Gakkai as “Kosen-rufu Day,” a moment that symbolizes the spirit of youth, responsibility, and the enduring pursuit of peace. This day commemorates a historic gathering in 1958, when Josei Toda entrusted the future of the movement to the younger generation. In the early morning chill at the foot of Mount Fuji, around 6,000 young members gathered, unaware they were about to become part of a defining moment. Despite challenges and
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9 hours ago2 min read


May 3—Eternal Day of Fresh Departure
May 3 is celebrated as “Soka Gakkai Day,” a significant occasion in the history of the Soka Gakkai that marks important milestones in its development. On this day in 1951, Josei Toda was inaugurated as the second president, ushering in a new era of growth and determination. Nearly a decade later, on May 3, 1960, Daisaku Ikeda became the third president, further advancing the organization’s mission on a global scale. At the time of Toda’s leadership, the organization had only
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9 hours ago1 min read


🚩‼️ओ३म्‼️🚩 | 🕉️🙏नमस्ते जी | दिनांक - ०५ अप्रैल २०२६ ईस्वी | दिन - - रविवार
🚩‼️ओ३म्‼️🚩 🕉️🙏नमस्ते जी दिनांक - ०५ अप्रैल २०२६ ईस्वी दिन - - रविवार 🌖 तिथि -- तृतीया ( ११:५९ तक तत्पश्चात तत्पश्चात चतुर्थी ) 🪐 नक्षत्र - विशाखा ( १२:०८ अप्रैल ६ तक तत्पश्चात अनुराधा ) पक्ष - - कृष्ण मास - - वैशाख ऋतु - - बसंत सूर्य - - उत्तरायण ) 🌞 सूर्योदय - - प्रातः ६:०७ पर दिल्ली में 🌞 सूर्यास्त - - सायं १८:४१ पर 🌖 चन्द्रोदय -- २१:५८ पर 🌖 चन्द्रास्त - - ७:३३ पर सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२७ कलयुगाब्द - - ५१२७ विक्रम संवत् - -२०८३ शक
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13 hours ago3 min read


• God is Formless •
• God is Formless • ---------------------------- In Vedic philosophy (Darshanas), even Bhagavan (which refers to God – Brahman – Ishvara – Paramatma) is considered one of the Dravyas (substances – vastus – padarthas). This suggests that God possesses gunas (attributes) and is also capable of performing various actions. Indeed, God is Omnipotent (sarva-shaktimaan), meaning He can accomplish His divine works – such as the creation, sustenance, and dissolution of the Universe, t
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13 hours ago3 min read


धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!!
धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!! ==================== १.धर्म का आधार ईश्वर और मजहब का आधार मनुष्य है, धर्म उस ज्ञान का नाम है जिसे मनुष्यों और प्राणिमात्र के कल्याण के लिए परमात्मा ने आदि सृष्टि में प्रदान किया, मजहब वह है जिसे मनुष्यों ने समय समय पर अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए स्वीकार किया और पुन: स्वार्थ सिद्धि के लिए उसका विस्तार किया।। २.धर्म ईश्वर प्रदत्त है इसलिए एक है इसमें हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, यहूदी, पारसी किसी के लिए भी भेद-भाव नहीं, इस
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13 hours ago3 min read


पत्र जो बांह फडका दे !
पत्र जो बांह फडका दे ! वीरवर छत्रपति शिवाजी की पुण्य तिथि 4 अप्रैल पर शत शत नमन औरंगजेब छत्रपति शिवाजी महाराज से इतना आतंकित था कि शायस्ता खान और अफजल खान के असफल हो जाने के बाद उसने आगरे के महाराज जय सिंह जिनके नाम पर जयपुर बसा है को बरगलाकर तैयार कर लिया कि वो दक्षिण जाकर शिवाजी को बंदी बनाकर या मारकर उसके समक्ष लाये। शिवाजी ने औरंगजेब की जाल में फंसे अपने एक वीर हिंदू भाई को युध्द के पहले समझाना उचित समझा । इसलिये अपने एक फारसी के विद्वान मुंशी से अपने भाव व्यक्त करते हुये
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2 days ago8 min read


स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश
स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश #डॉ_विवेक_आर्य ( स्वामी जी की पुण्यतिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) एक बार आर्य समाज के स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - “वैदिक धर्म की जय !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोली में भिक्षा डाली और कहा, “महात्मा जी, कोई उपदेश दीजिए !” स्वामी जी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “वैदिक धर्म की जय !”उस घर की स्त्री ने उस दिन खीर बनायीं
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2 days ago1 min read


लौह पुरुष स्वामी स्वतंत्रानन्द का जीवन और दर्शन
लौह पुरुष स्वामी स्वतंत्रानन्द का जीवन और दर्शन पुण्यतिथि पर शत शत नमन 1877-- 3/4/1955 लेखक :- श्री सुखवीर दलाल (जाट ज्योति) प्रस्तुति:- अमित सिवाहा यह किसका फसाना है यह किसकी कहानी है। सुनकर जिसे महफिल की हर आंख में पानी है।। दे मुझको मिटा ज़ालिम मत धर्म मिटा मेरा। यह धर्म मेरे ऋषियों मुनियों की निशानी है।। [श्री उपाध्याय] जन्म: स्वामी स्वतंत्रानन्द जी का जन्म पौष मास
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2 days ago7 min read


महर्षि दयानन्द की हितकारी शिक्षाएं
महर्षि दयानन्द की हितकारी शिक्षाएं 1. मनुष्यों को चाहिए कि जितना अपना जीवन शरीर, प्राण, अन्तःकरण, दशों इन्द्रियाँ और सब से उत्तम सामग्री हो उसको यज्ञ के लिये समर्पित करें जिससे पापरहित कृत्यकृत्य होके परमात्मा को प्राप्त (योग से) होकर इस जन्म और द्वितीय जन्म में सुख को प्राप्त हों। -महर्षि दयानन्द (यजु० 22/33) 2. जैसे प्रत्येक ब्रह्माण्ड में सूर्य प्रकाशमान है, वैसे सर्वजगत में परमात्मा प्रकाशमान है। जो योगाभ्यास से उस अन्तर्यामी परमेश्वर को अपने आत्मा से युक्त करते हैं, वे स
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2 days ago2 min read


मराठा शक्ति का पराक्रम
मराठा शक्ति का पराक्रम ( वीर छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्य तिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) -------- भारतीय इतिहासकार मूलत विदेशी इतिहासकारों और मुग़लों के वेतनभोगी इतिहास लेखकों का अनुसरण करते दीखते हैं। पाठ्य पुस्तकों में हो या मिडिया में हर जगह हिन्दुत्व को नीचा दिखाने की कोशिश होती है. जावेद अख्तर राजपूतों को हारा हुआ राजा बताता है तो मुगलों को अपना अब्बाजान. मनोज मुन्तशिर के मुगलों पर कडवा सच कहने पर टुकड़े टुकड़े गैंग आग बबूला हो गया. उसका यूट्अूब अकाउंट तक बंद
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2 days ago6 min read


3.4.2026 - सोचने का ढंग
3.4.2026 आज जो संसार के लोग दुखी हैं, इसका एक बहुत बड़ा कारण यह है, कि "उन्हें सोचने का ढंग ठीक से नहीं आता। वे ठीक से सोचना नहीं जानते।" ऐसा नहीं है, कि "लोगों के पास सुखी होने के लिए वस्तुएं न हों।" उनके पास बहुत सी वस्तुएं हैं। परंतु उनके सोचने में गलती यह है कि "जो वस्तुएं उनको प्राप्त हैं, उनका तो वे सुख लेते नहीं। और जो वस्तुएं अभी प्राप्त नहीं हो पाई, उन्हीं के बारे में सोच सोच कर दुखी होते रहते हैं," कि "मुझे यह वस्तु नहीं मिली। वह वस्तु नहीं मिली।
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3 days ago2 min read


🚩‼️ओ३म्‼️🚩 | 🕉️🙏नमस्ते जी | दिनांक - ०३ अप्रैल २०२६ ईस्वी | दिन - - शुक्रवार
🚩‼️ओ३म्‼️🚩 🕉️🙏नमस्ते जी दिनांक - ०३ अप्रैल २०२६ ईस्वी दिन - - शुक्रवार 🌖 तिथि -- प्रतिपदा ( ८:४२ तक तत्पश्चात द्वितीया ) 🪐 नक्षत्र - चित्रा ( १७:२५ तक तत्पश्चात स्वाति ) पक्ष - - कृष्ण मास - - वैशाख ऋतु - - बसंत सूर्य - - उत्तरायण ) 🌞 सूर्योदय - - प्रातः ६:०९ पर दिल्ली में 🌞 सूर्यास्त - - सायं १८:४० पर 🌖 चन्द्रोदय -- २०:०४ पर 🌖 चन्द्रास्त - - ६:२७ पर सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२७ कलयुगाब्द - - ५१२७ विक्रम संवत् - -२०८३ शक संवत् - - १९४८ द
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3 days ago3 min read


Jai Japan - #9 - Why Do So Many Women in Japan Dream of Becoming a Housewife?
Why Do So Many Women in Japan Dream of Becoming a Housewife? Recently I asked a few Japanese friends… even some of my kids’ friends: “What’s your dream for the future?” And surprisingly, many girls still say: “I want to be a housewife.” Not influencer. Not CEO. Not pilot. Housewife. At first I was shocked — in 2026? Really? But after living in Japan long enough, I started to understand the deeper reasons behind this dream. Here are some possible reasons 1. Housewife = stabil
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3 days ago2 min read


Jai Japan - #8 - "BLACK COMPANY" in JAPAN
A few days ago, I was chatting with a foreign friend here in Japan. He looked exhausted… like really exhausted. I asked him, “忙しいの?” (Busy?) He laughed and said, “Not busy… just working in a black company.” That word again. ブラック企業. If you’ve lived in Japan long enough, you’ve probably heard it. At first, I didn’t understand it either. Japan is known for discipline, responsibility, and hard work… so what’s the difference? But after hearing more stories, I realized something im
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3 days ago2 min read


कुतर्क का वैदिक उत्तर : जय आर्यावर्त
अज्ञानियों के कुतर्क का वैदिक उत्तर : जय आर्यावर्त कुतर्क ― इन्सान ने ही भगवान का निर्माण किया है तर्क ― पुत्र कभी पिता का निर्माण कर सकता है क्या ? हम अपने 500- 1000 वर्ष पहले की कुल, परिवार, पूर्वजों की शाखा - श्रृंखला का पता नही कर सकते, और दावा ईश्वर को बारे में जानने का करते हैं। जब अदृश्य वायु, ऊर्जा, शक्ति को मानव समझकर खोज/पाने की आकांक्षा नही की जाती तो अदृश्य ईश्वर को मानव समझकर पाने की मूर्खता क्यों करते हैं लोग ? इनके दिये अतार्किक प्रश्नों को वैदिक सत्य के वार स
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3 days ago10 min read


ओ३म् - #तीन #सीखें
ओ३म् #तीन #सीखें --- बहुत समय पहले की बात है , सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था । राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें. इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला "पुत्रों , हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है , मैं चाहता हूँ तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?” राजा की आज्ञा
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3 days ago2 min read
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