top of page
Search
* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश •
* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश • ------------------------------------ येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृढा येन स्वः स्तभितं येन नाकः। योऽअन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ -- यजुर्वेद : अध्याय 32, मंत्र 6 अर्थ : (येन) जिस परमात्मा ने (उग्रा) तीक्ष्ण स्वभाव वाले (द्यौः) सूर्य आदि (च) और (पृथिवी) भूमि को (दृढा) धारण, (येन) जिस जगदीश्वर ने (स्वः) सुख को (स्तभितम्) धारण, और (येन) जिस ईश्वर ने (नाकः) दुःखरहित मोक्ष को धारण किया है, (यः) जो (अन्तरिक्षे) आक
kcptokyomarathon20
Apr 263 min read
bottom of page
