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Savarkar, Shuddhi and Swami Dayanand
Savarkar, Shuddhi and Swami Dayanand Dr. Vivek Arya It was year 1913. Vinayak Savarkar, the great patriot was imprisoned in the Andaman Jail of Port Blair. Savarkar found a very strange pattern of discrimination in Jail. The higher officials in Jail were mainly British while the junior ranks were occupied mostly by Pathans from North West Frontier Province. It was usual for Muslim Pathans to use abusive language for Hindu prisoners because they consider them as Kafirs. They
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* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश •
* सृष्टि का धारक परमात्मा और उसकी उपासना का संदेश • ------------------------------------ येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृढा येन स्वः स्तभितं येन नाकः। योऽअन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ -- यजुर्वेद : अध्याय 32, मंत्र 6 अर्थ : (येन) जिस परमात्मा ने (उग्रा) तीक्ष्ण स्वभाव वाले (द्यौः) सूर्य आदि (च) और (पृथिवी) भूमि को (दृढा) धारण, (येन) जिस जगदीश्वर ने (स्वः) सुख को (स्तभितम्) धारण, और (येन) जिस ईश्वर ने (नाकः) दुःखरहित मोक्ष को धारण किया है, (यः) जो (अन्तरिक्षे) आक
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महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के अमूल्य उपदेश [भाग १]
प्रस्तुति- प्रियांशु सेठ १. जैसे शीत से आतुर पुरुष का अग्नि के पास जाने से शीत निवृत्त हो जाता है वैसे परमेश्वर के समीप प्राप्त होने से सब दोष दुःख छूटकर परमेश्वर के गुण कर्म स्वभाव के सदृश जीवात्मा के गुण कर्म स्वभाव पवित्र हो जाते हैं। (सत्यार्थप्रकाश समुल्लास ७) २. जो परमेश्वर की स्तुति, प्रार्थना और उपासना नहीं करता वह कृतघ्न और महामूर्ख भी होता है क्योंकि जिस परमात्मा ने इस जगत् के सब पदार्थ सुख के लिए दे रखे हैं उसके गुण भूल जाना ईश्वर ही को न मानना कृतघ्नता और मूर्खता
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Apr 262 min read
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