top of page

Discover Our Passion for Stories

At Aryaa Publications, we transform your literary into reality with our customized publishing solutions. Become part of our vibrant of passionate authors and watch your stories soar to new heights!

Search

सेक्युलरीज्म का दीमक -


सेक्युलरिज्म का दीमक भारत को खोखला कर है. इसके कारण विभाजन हुआ और कश्मीर की समस्या हमारे हिस्से में आई. यदि सरदार पटेल के हाथ में देश की बागडोर होती तो कश्मीर समस्या नहीं होती. इस समस्या के इतिहास और वर्तमान को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी पुस्तक.

1- सरदार पटेल, भारत विभाजन. ₹600

2- कश्मीर झूलसता स्वर्ग. ₹140

दोनों पुस्तक विशेष छूट के साथ केवल ₹500 ( डाक खर्च सहित)

मंगवाने के लिए 094855 99275 पर वट्सएप द्वारा सम्पर्क करें.

-------------------------

सरदार पटेल, भारत विभाजन--

सरदार पटेल के काम करने और निर्णय लेने के ढंग से लोग अच्छी तरह परिचित हो गए थे । कभी कोई बात उनके मुख से निकल गई तो समझिये वह पत्थर की लकीर हो गई । पाकिस्तान भी सरदार के इस स्वभाव से परिचित हो गया था। पूर्वी बंगाल से प्रारम्भ में जब लाखों हिन्दू धक्का देकर बाहर निकाले जा रहे थे, तब सरदार के धैर्य का बाँध एक दिन टूट गया। भले ही उनका एक अलग देश बन गया था। कल तक तो वह अपने ही भाई थे. विभाजन के समय गांधी जी से लेकर नीचे तक के सभी नेताओं ने उन्हें यह आश्वासन दिया था. देश भले ही दो बन गये हैं पर एक दूसरे के सुख - दुख में हम पहले की तरह ही भागीदार रहेंगे। कभी तुम पर कोई मुसीबत का पहाड़ टूटेगा तो हम मूक दर्शक बने नहीं देखते रहेंगे। पाकिस्तान को उन्होंने कहा यदि तुम्हें इन अल्पसंख्यकों का वहाँ रहना नहीं सुहाता तो उन्हें थोड़ा - थोड़ा कर के भेजने की बजाय अच्छा यह हो एक साथ ही सब को भेज दो। उसके बदले में भारत से उतने ही अल्पसंख्यक तुम ले लो । यदि यह सुझाव पसन्द न हो तो फिर पाकिस्तान पूर्वी बंगाल की उतनी भूमि हमें दे दे जिससे वहां इन्हें बसाया जा सके। पर यदि यह दोनों सुझाव भी तुम्हारे गले से नीचे नहीं उतरते तो फिर भारत अगला निर्णय लेने में स्वतंत्र रहेगा। जूनागढ़ , हैदराबाद और काश्मीर ये तीनों रियासतें ऐसी थीं जो भारत में विलय के लिए चुनौती बन गई थीं । जनता की राय से जूनागढ़ रियासत के भविष्य का फैसला होना था. नवाब जूनागढ़ स्वयं रियासत के भारत में विलय के पक्ष में नहीं थे। इसलिये जनमत संग्रह की बात बीच में आई. जनमत संग्रह होते ही सरदार ने कुछ ही दिनों में उसका परिणाम नवाब के सामने रख दिया । इस तरह जूनागढ़ सदा के लिए भारत का अभिन्न भाग बन गया । हैदराबाद का निजाम भी रजाकारों के चक्कर में आकर सरदार को हैदराबाद में उँगली नहीं रखने दे रहा था। सरदार ने सोचा यदि देर तक इसी हालत में हैदराबाद को रहने दिया गया तो यह कहीं भारत के लिए नासूर न बन जाय? पर कच्चे घाव का आपरेशन करना भी वह नहीं चाहते थे । एक दिन जब फोड़ा पक गया तो सरदार ने एक नश्तर में ही सारा मवाद निकाल कर बाहर कर दिया. आसफजाही झंडा जो कभी लाल किले पर फहराने के स्वप्न देख रहा था वह सदा के लिए दफना दिया गया और अशोक चक्रांकित तिरंगा ध्वज हैदराबाद की किंग कोठी पर शान से लहराने लगा। वह ही हैदराबाद आज आन्ध्रप्रदेश की राजधानी है।

कश्मीर - झूलसता स्वर्ग -

काश्मीर रियासत का हल शेख अब्दुल्ला के चक्कर में आकर न जाने क्यों अन्य रियासतों की तरह सरदार को नहीं सौंपा गया। केवल 1947 में पाकिस्तानी हमलावरों को निकालने का काम ही उन्हें दिया गया. पर उसमें भी जब अन्तिम दिनों में काश्मीर से खूंखार पाकिस्तानी दरिंदे बाहर निकाले जा रहे थे तब सरदार से बिना पूछे अचानक बीच ही में लड़ाई बन्द कर दी गई। जो हिस्सा काश्मीर का उस समय बच गया वह आज भी पाकिस्तान के अधिकार में है। शेष काश्मीर का भविष्य भी अभी तक अधर में ही लटका दिया. अपने ही संविधान की धारायें उसमें बाधक बना दी गई । अरबों रुपया काश्मीर पर व्यय हो गया । हजारों मां के लाल मौत के मुंह में सो गये. सरदार न होते तो अभी पता नहीं कितनी और देशी रियासतें भारत के गले में हड्डी बन कर अटकी रहतीं ।



 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page