सावरकर !!
सावरकर -
स्वार्थ के लिए इतिहास को विचित्र रूप से परिभाषित किया जा रहा है। सेक्युलरीज्म के नाम पर गाँधी को नायक व सावरकर को खलनायक बताया जा रहा है। ये पुस्तकें इस भ्रम जाल को हटाने के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी।
1- वीर सावरकर। MRP ₹500
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1- वीर सावरकर। लेखक उदय माहुरकर।
भारत विभाजन बीसवीं शताब्दी की विकट मानव त्रासदी थी, जिसने बड़े पैमाने पर अभूतपूर्व हिंसा देखी। हिंसा की प्रणेता वे इच्छुक पार्टियाँ थीं, जिन्होंने अपने राजनीतिक एवं विचारधारात्मक कारणों से उसे भड़काया था। विभाजन की ओर प्रवृत्त करनेवाले वास्तविक कारणों का विश्लेषण करें तो उसका पाठ भारत की एकता एवं अखंडता में निहित है, जिसका प्रमाण वीर सावरकर द्वारा विभाजन को रोकने के लिए किए गए अथक प्रयासों में मिलता है। तार्किक रूप से भारत की राष्ट्रीय अखंडता के महानतम प्रतीक सावरकर को ओर से भारत की सुरक्षा के प्रति जो चेतावनियाँ दी गई थीं, वे विगत सात दशकों में सत्य सिद्ध हुई हैं।
#सावरकर
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गाँधी और सावरकर-
शुद्धि हो या स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या, मोपला द्वारा हिन्दू नरसंहार हो या पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए देने के लिए अनशन करना। यह सब वह कार्य थे जिसे आज की पीढ़ी नहीं जानती।
हिन्दू संगठन पर सावरकर किस तरह गाँधी जी से भिन्न विचार रखते थे? 1857 की क्रान्ति पर सावरकर के क्या विचार थे? हिन्दी, हिन्दू और हिंदुस्तान पर सावरकर का क्या सोचना था?



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