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धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!!
धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!! ==================== १.धर्म का आधार ईश्वर और मजहब का आधार मनुष्य है, धर्म उस ज्ञान का नाम है जिसे मनुष्यों और प्राणिमात्र के कल्याण के लिए परमात्मा ने आदि सृष्टि में प्रदान किया, मजहब वह है जिसे मनुष्यों ने समय समय पर अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए स्वीकार किया और पुन: स्वार्थ सिद्धि के लिए उसका विस्तार किया।। २.धर्म ईश्वर प्रदत्त है इसलिए एक है इसमें हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, यहूदी, पारसी किसी के लिए भी भेद-भाव नहीं, इस
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16 hours ago3 min read


स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश
स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश #डॉ_विवेक_आर्य ( स्वामी जी की पुण्यतिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) एक बार आर्य समाज के स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - “वैदिक धर्म की जय !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोली में भिक्षा डाली और कहा, “महात्मा जी, कोई उपदेश दीजिए !” स्वामी जी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “वैदिक धर्म की जय !”उस घर की स्त्री ने उस दिन खीर बनायीं
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2 days ago1 min read


मराठा शक्ति का पराक्रम
मराठा शक्ति का पराक्रम ( वीर छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्य तिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) -------- भारतीय इतिहासकार मूलत विदेशी इतिहासकारों और मुग़लों के वेतनभोगी इतिहास लेखकों का अनुसरण करते दीखते हैं। पाठ्य पुस्तकों में हो या मिडिया में हर जगह हिन्दुत्व को नीचा दिखाने की कोशिश होती है. जावेद अख्तर राजपूतों को हारा हुआ राजा बताता है तो मुगलों को अपना अब्बाजान. मनोज मुन्तशिर के मुगलों पर कडवा सच कहने पर टुकड़े टुकड़े गैंग आग बबूला हो गया. उसका यूट्अूब अकाउंट तक बंद
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2 days ago6 min read
डाकू आर्य सन्यासी बन गया
#डॉ_विवेक_आर्य सन 1976 में पाणिनि कन्या गुरुकुल, बनारस की आचार्या प्रज्ञा देवी को बोलथरा रोड,जिला आजमगढ़,उत्तर प्रदेश के एक स्वर्णकार ने अपने ग्राम में चतुर्वेद परायण यज्ञ संपन्न करने हेतु आमंत्रित किया था। प्रज्ञा देवी के साथ सुप्रसिद्ध भजन उपदेशक श्री ब्रिजपाल जी कर्मठ एवं पंडित ओमप्रकाश वर्मा को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के अंतिम दिन एक विशेष घटना घटित हुई। उस दिन कार्यक्रम में एक डाकू कंधे पर बन्दुक टांगे हुए वहां पर आकर बैठ गया। वहां के मूल निवासियों ने तो उसे पह
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4 days ago4 min read
प्रेरणादायक संस्मरण
प्रेरणादायक संस्मरण स्वामी दर्शनानन्द जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन एक आदर्श सन्यासी के रूप में गुजरा। उनका परमेश्वर में अटूट विश्वास एवं दर्शन शास्त्रों के स्वाध्याय से उन्नत हुई तर्क शक्ति बड़ो बड़ो को उनका प्रशंसक बना लेती थी। संस्मरण उन दिनों का हैं जब स्वामी जी के मस्तिष्क में ज्वालापुर में गुरुकुल खोलने का प्रण हलचल मचा रहा था। एक दिन स्वामी जी हरिद्वार की गंगनहर के किनारे खेत में बैठे हुए गाजर खा रहे थे। किसान अपने खेत से गाजर उखाड़कर , पानी से धोकर बड़े प्रेम से खिला रहा था
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5 days ago2 min read
'शहरी नक्सली' की परिभाषा
'शहरी नक्सली' की परिभाषा #डॉ_विवेक_आर्य वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने सरकार से 'शहरी नक्सली' शब्द को परिभाषित करने की मांग की है। कमाल देखिये अपने आपको बुद्धिजीवी कहने वाली और दशकों से सत्ता का समर्थन लेकर भारत के शिक्षा संस्थानों के पाठयक्रम को निर्धारित करने वाली रोमिला थापर 'शहरी नक्सली' की परिभाषा तक नहीं जानती। कोई बात नहीं हम उनके इस अज्ञान की पूर्ति कर देते हैं। 'शहरी नक्सली' वो है जो- 1. विश्वविद्यालयों में बीफ फेस्टिवल बनाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते है और अपने
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5 days ago3 min read


#दिए_तले_अँधेरा
#डॉ_विवेक_आर्य एक ईसाई प्रचारक बड़े जोश में #पंजाब के देहात में जाकर प्रचार करने लगा। उसने सोचा की मसीह की शिक्षा को बढ़िया दिखाने के लिए हिन्दुओं के पुराणों की खिल्ली उड़ानी चाहिए जिससे की हिन्दू अपने ही पुराणों से घृणा करने लगे और मसीह की शिक्षा पर विश्वास लाये। मगर उसकी किस्मत ने उसे धोखा दिया और वह एक पेशावरी टोपी पहने #आर्यसमाजी प्रचारक से टकरा गया। पादरी- हिन्दुओं को पुराणों की शिक्षा को छोड़कर ईसा मसीह की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए देखो विष्णु, मत्सय, लिंग आदि पुराणों में क्
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5 days ago4 min read
लोहारू का मुस्लिम नवाब और आर्यसमाज का संघर्ष
लोहारू का मुस्लिम नवाब और आर्यसमाज का संघर्ष (29 मार्च 1941 को लोहारू कांड के उपलक्ष पर प्रकाशित) #डॉ_विवेक_आर्य लोहारू 1947 से पहले एक मुस्लिम रियासत थी।पंजाब प्रांत में हिसार, शेखावाटी और बीकानेर से घिरा हुआ है छोटा सा नवाबी राज्य लोहारु। लोहारू की स्थापना अहमदबक्शखां ने 1803 में की थी। अंग्रेजों ने उन्हें यह रियासत जाट राजा भरतपुर के विरोध में सहायता करने के लिए दी थी। सन् 1935 के मध्य महीनों में तमाम जनता की निगाह में आ गया जबकि यहां के तेजस्वी किसानों ने नवाब की तानाशाही
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7 days ago7 min read


आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम
आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम स्वामी दयानंद- सर्वप्रथम देहरादून में एक मुस्लमान को शुद्ध कर उनका अलखधारी नाम रख कर आधुनिक भारत में सदियों से बंद घर वापसी के द्वार को खोला स्वामी श्रद्धानन्द- लाखों मलकाने राजपूतों जो नौमुस्लिम कहलाते थे उन्हें शुद्ध किया और व्यवस्थित रूप से सकल हिन्दू समाज को संगठित करने का उद्घोष किया। शुद्धि चक्र को सार्थक रूप से अखिल भारतीय स्तर पर चलाया एवं अपना बलिदान भी दिया। पंडित लेखराम- सिंध से लेकर सम्पूर्ण पंजाब में जहाँ भी क
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Mar 282 min read


रामचन्द्र जी का अद्भुत दर्शन
रामनवमी के अवसर पर प्रकाशित रामचन्द्र जी ईश्वर के भक्त, वेदों के विद्वान्, सभी में प्रिय, सत्यवादी, कर्मशील, आदर्श, आज्ञाकारी, वचन के दृढ़ आदि सभी शस्त्र विद्याओं में निपुण व्यक्ति थें। उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति दुःखी नहीं, कोई नारी विधवा नहीं, कहीं अकाल नहीं, कहीं चोरी, द्यूत आदि नहीं होता था। कुछ लोग रामचन्द्र जी के बारे में पूर्ण रूप से उनका व्यक्तित्त्व न जानकर और विशेष दूसरे सम्प्रदाय के लोग उनपर आक्षेप करते हैं जिसमें मुख्य यह प्रचलन में है कि रामचन्द्र जी मांस का से
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Mar 266 min read
भगतसिंह के प्रेरणास्रोत
भगतसिंह के प्रेरणास्रोत #डॉ_विवेक_आर्य इस लेख को पढ़ने वाले ज्यादातर वे पाठक हैं जिन्होंने आजाद भारत में जन्म लिया। यह हमारा सौभाग्य है कि हम जिस देश में जन्मे हैं, उसे आज कोई गुलाम भारत नहीं कहता, उपनिवेश नहीं कहता- बल्कि संसार के एक मजबूत स्वतंत्र राष्ट्र के नाम से हमें जाना जाता है। इस महान भारत देश को आजाद करवाने के लिये हजारों क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति आजादी के पवित्र यज्ञ में डाली। तब कहीं जाकर हम आजाद हुए। भगतसिंह के बलिदान का महत्त्व भगतसिंह का नाम भारत
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Mar 246 min read


क्या श्री राम जी माँसाहारी थे?
क्या श्री राम जी माँसाहारी थे? By #डॉ_विवेक (Child Specialist Delhi) (ध्रुव राठी यूटूबर ने यह आक्षेप लगाया है कि श्री राम जी मांसहारी थे और शराब भी पीते थे। इस लेख में लेखक ने ध्रुव राठी की बकवास का सप्रमाण उत्तर दिया है। इस लेख को पढ़े और अन्यों को भी पढ़ाएं। श्री राम जी से सम्बन्धित भ्रांतियों के निवारण के लिए लेखक द्वारा लिखित पुस्तक रामायण को जानें अवश्य पढ़े। पुस्तक प्राप्त करने के लिए whastapp द्वारा इस नंबर पर संपर्क करें। 09485599275) क्या श्री राम जी माँसाहारी थे? इस शं
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Mar 248 min read
LIBERATION SCIENCE IN THE VEDA
LIBERATION SCIENCE IN THE VEDA Tad in naktam tad divaa mahyam aahuḥ Tad ayam keto hṛida aa-vi-chaṣhṭe Shunaḥ-shepo yam ahwad gṛibheetaḥ So asmaan raajaa varuṇo mumoktu – 1:24:12 1. Naktam Divaa – By night and by day 1. Tat It Mahyam Aahuḥ – Scholars repeatedly explain to me this (Vedic Knowledge of Liberation). 1. Tat Ayam Hṛidaḥ Ketaḥ Aa-vi-chaṣhṭe – The intuition in my heart also looks forward to this: 1. Shunaḥ-shepaḥ Yam Ahwad Gṛibheetaḥ – The one whom Shunaḥshepa
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Mar 225 min read


।।ओ३म्।। - नववर्ष, चैत्र शुक्ल सृष्टि संवत 1960853127 ,विक्रमी संवत् 2083 हार्दिक शुभकामनाएं! - ।।ओ३म्।।
आप व आपके परिवार को वैदिक नववर्ष, चैत्र शुक्ल सृष्टि संवत 1960853127 ,विक्रमी संवत् 2083 , दयानंदाब्द 203,19 मार्च 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! प्राता रत्नं प्रातरित्वा दधाति तं चिकित्वान्प्रतिगृह्या नि धत्ते। तेन प्रजां वर्धयमान आयू रायस्पोषेण सचते सुवीर:।। -ऋ० १/१२५/१ Bhavarth:- The learned hero who is in the habit of getting up early in the morning, enjoys and maintains bliss in the morning (by meditation on God) and having acquired the enjoyable knowledge, he preserves it
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Mar 194 min read


युवा मनीषी-पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी
पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी के निर्वाण दिवस 19 मार्च पर विशेष रूप से प्रकाशित पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी एक युवक दार्शनिक विद्वान् थे जिन्होंने चौबीस वर्ष (24) की अल्पायु में ही संस्कृत, अरबी, फ़ारसी, अंग्रेजी, वैदिक साहित्य, अष्टाध्यायी, भाषा विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, नक्षत्र विज्ञान, शरीर विद्या, आयुर्वेद, दर्शन शास्त्र, इतिहास, गणित आदि का जो समयक ज्ञान प्राप्त कर लिया था , उसे देख कर बड़े-बड़े विद्वान चकित रह जाते थे।उनके ज्ञान का अनुमान लगाना पर्वत को तोल
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Mar 197 min read


ठगी का मकड़जाल
आजकल सभी अखबारों में ,रेलवे स्टेशनों पर रेल गाड़ियों ने बसों में तथा लगभग सभी सार्वजानिक दीवारों पर आपको औलियाओं ,मोलवियों ,बंगाली मियां जादूगर बाबाओ और तांत्रिको के विज्ञापन , स्टिकर व् पोस्टर लगे मिल जाएंगे जिनमे तरह–तरह के झूठे आश्वासनों और घटिया हथकंडो का सहारा लेकर भोले-भाले और मूर्ख ( विशेषकर महिलाओं ) लोगों को उनकी तकलीफों ,समस्याओं, गृहकलेशों, आर्थिक व पारिवारिक समस्याओं ,प्रेम संबंधों आदि से छुटकारा दिलाने का झूठा और बेबुनियाद झांसा देकर फसाया जाता है। उनका आर्थिक ,मा
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Mar 173 min read
वेद और पाप निवारण
वेदों में पाप निवारण के विषय में ईश्वर से सबसे अधिक प्रार्थना निष्पापता अर्थात कभी पाप न करने की गई हैं। पाप निवारण की प्रार्थना का अर्थ यह नहीं हैं समझना चाहिए की किये हुए पाप नष्ट हो जाते हैं, अपितु इसका तात्पर्य यह हैं की मनुष्य पाप कर्म से सदा दूर ही रहे। वेद में पाप निवारण के लिए अनेक मंत्र दिए गए हैं जिनमें मनुष्य ईश्वर से ऐसी मति, ऐसी बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता हैं, जिससे वह केवल और केवल सत्य मार्ग पर चलता रहे और पाप कर्म से सर्वथा दूर रहे। मनुष्य इन मन्त्रों
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Mar 165 min read
क्या ईश्वर जीव के भविष्य में करने वाले कर्मों को जानता है?
धार्मिक जगत में एक प्रश्न सदा से उठता रहता है कि क्या ईश्वर जीव के भविष्य में करने वाले कर्मों को जानता है? यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्यूंकि प्राय: लोग ईश्वर को त्रिकालदर्शी बताते है। स्वामी दयानन्द इस विषय पर सत्यार्थ प्रकाश के सप्तम समुल्लास में इस प्रकार से विवेचना करते हैं। "(प्रश्न) परमेश्वर त्रिकालदर्शी है इस से भविष्यत् की बातें जानता है। वह अपने ज्ञान से जैसा निश्चय करेगा जीव वैसा ही करेगा। इस से जीव स्वतन्त्र नहीं। और जीव को ईश्वर दण्ड भी नहीं दे सकता। क्योंकि
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Mar 165 min read


मनुस्मृति और नारी जाति
भारतीय समाज में एक नया प्रचलन देखने को मिल रहा है। इस प्रचलन को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया में अपने आपको बहुत बड़े बुद्धिजीवी के रूप में दर्शाते है। सत्य यह है कि वे होते है कॉपी पेस्टिया शूरवीर। अब एक ऐसी ही शूरवीर ने कल लिख दिया मनु ने नारी जाति का अपमान किया है। मनुस्मृति में नारी के विषय में बहुत सारी अनर्गल बातें लिखी है। मैंने पूछा आपने कभी मनुस्मृति पुस्तक रूप में देखी है। वह इस प्रश्न का उत्तर देने के स्थान पर एक नया कॉपी पेस्ट उठा लाया। उसने लिखा- "ढोल, गंवार , शूद्र
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Mar 84 min read


संत रविदास और श्री राम
जय भीम, जय मीम का नारा लगाने वाले दलित भाइयों को आज के कुछ राजनेता कठपुतली के समान प्रयोग कर रहे हैं। यह मानसिक गुलामी का लक्षण है। अपनी राजनीतिक हितों को साधने के लिए दलित राजनेता और विचारक श्री राम जी के विषय में असभ्य भाषण तक करने से पीछे नहीं हट रहे है। कोई उन्हें मिथक बताता है, कोई विदेशी आर्य बताता है, कोई शम्बूक शुद्र का हत्यारा बताता है। सत्य यह है कि यह सब भ्रामक एवं असत्य प्रचार है जिसका उद्देश्य अपरिपक्व दलितों को भड़काकर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करना है। मगर इस
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Mar 12 min read
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