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भारतीय इतिहास के साथ एक सुनियोजित खिलवाड़
भारतीय इतिहास के साथ एक सुनियोजित खिलवाड़ (6 जून 1674 को वीर छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ था। शिवाजी के सिंघासन आरोहण का प्रभाव अगली एक शताब्दी तक हम पूरे भारत में देखते है जब मराठा शक्ति पूरे भारत पर छा गई। आज शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के उपलक्ष में यह ऐतिहासिक लेख प्रकाशित किया जा रहा हैं। -डॉ विवेक आर्य) भारतीय इतिहास की पाठय पुस्तकों में औरंगजेब और शिवाजी के संघर्ष के पश्चात चुनिन्दा घटनाओं को ही प्राथमिकता से बताया जाता हैं जैसे की नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली द्
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Jun 613 min read


कार्ल मार्क्स और धर्म
5 मई को कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। अनेक कम्युनिस्ट धर्म को अफीम कह रहे थे। इस लेख से जानिए कि क्या धर्म अफीम है? नहीं। तो फिर अफीम क्या है? Written and shared by #डॉ_विवेक_आर्य कार्ल मार्क्स के वचन पढ़िए 1.) Religion is the opium of the masses अर्थात रिलिजन लोगों का अफीम है ! 2.) The first requisite for the happiness of the people is the abolition of religion अर्थात लोगों की ख़ुशी के लिए पहली आवश्यकता रिलिजन का अंत है ! तथा 3.) Religion is the impotence of the human mind to
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May 54 min read


वैदिक संस्कृत के उपासक:महात्मा प्रेमभिक्षु जी
वैदिक संस्कृत के उपासक:महात्मा प्रेमभिक्षु जी #डॉ_विवेक_आर्य (25 अप्रैल पुण्यतिथि के अवसर पर प्रकाशित) निष्ठावान प्रचारक, कार्यकर्ता, लेखक वह पत्रकार श्री ईश्वारीप्रसाद प्रेम/ महात्मा प्रेमभिक्षु जी का जन्म मथुरा के दरवै (देवनगर) में श्रवण कृष्णा 9 सम्वत 1981 विक्रमी को हुआ था। आपके पिता श्री पुरुषोत्तमदास जी निष्ठावान आर्यसमाजी थे। आपने ऍम.ए, साहित्यरत्न तथा सिद्धांत शास्त्री तक शिक्षा प्राप्त की थी। आप बालकाल से ही आर्यसमाज मथुरा में जाने लगे। 1942 में आप आर्यसमाज तिलकद्वार
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Apr 262 min read
युवा मनीषी-पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी
संकलनकर्ता- #डॉ_विवेक_आर्य पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी की जयंती 26/4/1890 पर विशेष रूप से प्रकाशित पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी एक युवक दार्शनिक विद्वान् थे जिन्होंने चौबीस वर्ष (24) की अल्पायु में ही संस्कृत, अरबी, फ़ारसी, अंग्रेजी, वैदिक साहित्य, अष्टाध्यायी, भाषा विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, नक्षत्र विज्ञान, शरीर विद्या, आयुर्वेद, दर्शन शास्त्र, इतिहास, गणित आदि का जो समयक ज्ञान प्राप्त कर लिया था , उसे देख कर बड़े-बड़े विद्वान चकित रह जाते थे।उनके ज्ञान का अनुम
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Apr 267 min read


आदि शंकराचार्य एवं स्वामी दयानन्द
(21 अप्रैल को आदि शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष में प्रकाशित) #डॉ_विवेक_आर्य आदि शंकराचार्य एवं स्वामी दयानन्द हमारे देश के इतिहास की दो सबसे महान विभूति है। दोनों ने अपने जीवन को धर्म रक्षा के लिए समर्पित किया था। दोनों का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और दोनों ने जातिवाद के विरुद्ध कार्य किया। दोनों के बचपन का नाम शंकर और मूलशंकर था। दोनों को अल्पायु में वैराग्य हुआ और दोनों ने स्वगृह त्याग कर देशाटन किया। दोनों ने धर्म के नाम पर चल रहे आडम्बर के विरुद्ध संघर्ष किया। दोनो
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Apr 215 min read
डॉ अम्बेडकर का राष्ट्रवादी चिंतन
डॉ अम्बेडकर का राष्ट्रवादी चिंतन भारतीय राजनीति अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जैसे अपने क्रांतिकारियों को जाति के आधार पर विभाजित कर लेती है वैसे ही महान व्यक्तित्वों को भी हमने जाति भेद के आधार पर विभाजित कर लेती है। डॉ अम्बेडकर। यह नाम सुनते ही पाठकों के मन में एक दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता उजागर होगी। मगर डॉ अम्बेडकर के जीवन के एक ऐसा पक्ष भी है जिसमें राष्ट्रवादी चिंतन के महान नेता के रूप में उनके दर्शन होते है। डॉ अम्बेडकर के नाम पर दलित रा
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Apr 145 min read
डॉ अम्बेडकर बनाम पेरियार
(डॉ अम्बेडकर की जयंती पर विशेष रूप से प्रकाशित) #डॉ_विवेक_आर्य IIT मद्रास में अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल के नाम से एक संगठन बना है। यह संगठन कम भानुमति का कुम्बा अधिक है। यह कुम्बा दलित, मुस्लिम, साम्यवादी, वंचित , शोषित, मूलनिवासी, अनार्य, दस्यु, द्रविड़, नवबौद्ध, नास्तिक, रावण और महिषासुर के वंशज, नाग जाति के वंशज आदि का बेमेल गठजोड़ हैं। इस संगठन का मूल उद्देश्य हमारे महान इतिहास, हमारी संस्कृति, हमारे धर्म ग्रन्थ, हमारी सभ्यता और हमारी परंपरा का विरोध करना हैं। यह ठीक ह
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Apr 145 min read


ओ३म्
ओ३म् !!!---: घोर घने वन में :---!! =============== एक बार विदुर जी संसार भ्रमण करके धृतराष्ट्र के पास पहुँचे तो धृतराष्ट्र ने कहा, "विदुर जी ! सारा संसार घूमकर आये हो आप, कहिये कहाँ-कहाँ पर क्या देखा आपने ?" विदुर जी बोले, "राजन् ! कितने आश्चर्य की बात देखी है मैंने। सारा संसार लोभ शृंखलाओं में फँस गया है। काम, क्रोध, लोभ, भय के कारण उसे कुछ भी दिखाई नहीं देता, पागल हो गया है। आत्मा को वह जानता ही नहीं।" तब एक कथा उन्होंने सुनाई। एक वन था बहुत भयानक। उसमें भूला-भटका हुआ एक व्
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Apr 113 min read


स्वामी दयानंद सरस्वती क्या और कैसे थे...??
महर्षि दयानंद के बारे मे अन्य महानुभबों के विचार .... १ - “स्वराज्य और स्वदेशी का सर्वप्रथम मन्त्र प्रदान करने वाले जाज्वल्यमान नक्षत्र थे दयानंद |” – लोक मान्य तिलक* २- “आधुनिक भारत के आद्द्निर्मता तो दयानंद ही थे | महर्षि दयानन्द सरस्वती उन महापुरूषो मे से थे जिन्होनेँ स्वराज्य की प्रथम घोषणा करते हुए, आधुनिक भारत का निर्माणकिया । हिन्दू समाज का उद्धार करने मेँ आर्यसमाज का बहुत बड़ा हाथ है।- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ३- “सत्य को अपना ध्येय बनाये और महर्षि दयानंद को अपनाआदर्श
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Apr 85 min read


हिन्द की चादर: गुरु तेग बहादुर जी
हिन्द की चादर: गुरु तेग बहादुर जी (प्रकाश उत्सव पर विशेष रूप से प्रचारित) #डॉ_विवेक_आर्य गुरु तेग बहादुर जी को हिन्द के चादर के नाम से जाना चाहता है। संसार को ऐसे बलिदानियों से प्रेरणा मिलती है, जिन्होंने अपने प्राण दे दिए पर सत्य के मार्ग का त्याग नहीं किया। नवम पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी भी ऐसे ही बलिदानी थे। गुरु जी ने स्वयं के लिए नहीं, बल्कि अन्यों के अधिकारों एवं विश्वासों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। गुरु जी 11 अगस्त 1664 को नवें गुरु के रूप में
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Apr 78 min read


हुतात्मा महाशय राजपाल की बलिदान गाथा एवं #रंगीला_रसूल 🙏
हुतात्मा महाशय राजपाल की बलिदान गाथा एवं #रंगीला_रसूल 🙏 6 अप्रैल बलिदान दिवस पर प्रकाशित #डॉ_विवेक_आर्य 🚩सन १९२३ में मुसलमानों की ओर से दो पुस्तकें "#१९वींसदीकामहर्षि" और “#कृष्णतेरीगीताजलानी_पड़ेगी ” प्रकाशित हुई थी। 🚩पहली पुस्तक में आर्यसमाज का संस्थापक #स्वामीदयानंद का सत्यार्थ प्रकाश के १४ सम्मुलास में कुरान की समीक्षा से खीज कर उनके विरुद्ध आपत्तिजनक एवं घिनौना चित्रण प्रकाशित किया था जबकि दूसरी पुस्तक में #श्रीकृष्ण जी महाराज के पवित्र चरित्र पर कीचड़ उछाला गया था।..
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Apr 65 min read


धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!!
धर्म और मजहब ( संमप्रदाय ) में अन्तर!!! ==================== १.धर्म का आधार ईश्वर और मजहब का आधार मनुष्य है, धर्म उस ज्ञान का नाम है जिसे मनुष्यों और प्राणिमात्र के कल्याण के लिए परमात्मा ने आदि सृष्टि में प्रदान किया, मजहब वह है जिसे मनुष्यों ने समय समय पर अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए स्वीकार किया और पुन: स्वार्थ सिद्धि के लिए उसका विस्तार किया।। २.धर्म ईश्वर प्रदत्त है इसलिए एक है इसमें हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, यहूदी, पारसी किसी के लिए भी भेद-भाव नहीं, इस
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Apr 53 min read


स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश
स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी का उपदेश #डॉ_विवेक_आर्य ( स्वामी जी की पुण्यतिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) एक बार आर्य समाज के स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - “वैदिक धर्म की जय !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोली में भिक्षा डाली और कहा, “महात्मा जी, कोई उपदेश दीजिए !” स्वामी जी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “वैदिक धर्म की जय !”उस घर की स्त्री ने उस दिन खीर बनायीं
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Apr 31 min read


मराठा शक्ति का पराक्रम
मराठा शक्ति का पराक्रम ( वीर छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्य तिथि 3 अप्रैल पर विशेष रूप से प्रकाशित) -------- भारतीय इतिहासकार मूलत विदेशी इतिहासकारों और मुग़लों के वेतनभोगी इतिहास लेखकों का अनुसरण करते दीखते हैं। पाठ्य पुस्तकों में हो या मिडिया में हर जगह हिन्दुत्व को नीचा दिखाने की कोशिश होती है. जावेद अख्तर राजपूतों को हारा हुआ राजा बताता है तो मुगलों को अपना अब्बाजान. मनोज मुन्तशिर के मुगलों पर कडवा सच कहने पर टुकड़े टुकड़े गैंग आग बबूला हो गया. उसका यूट्अूब अकाउंट तक बंद
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Apr 36 min read
डाकू आर्य सन्यासी बन गया
#डॉ_विवेक_आर्य सन 1976 में पाणिनि कन्या गुरुकुल, बनारस की आचार्या प्रज्ञा देवी को बोलथरा रोड,जिला आजमगढ़,उत्तर प्रदेश के एक स्वर्णकार ने अपने ग्राम में चतुर्वेद परायण यज्ञ संपन्न करने हेतु आमंत्रित किया था। प्रज्ञा देवी के साथ सुप्रसिद्ध भजन उपदेशक श्री ब्रिजपाल जी कर्मठ एवं पंडित ओमप्रकाश वर्मा को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के अंतिम दिन एक विशेष घटना घटित हुई। उस दिन कार्यक्रम में एक डाकू कंधे पर बन्दुक टांगे हुए वहां पर आकर बैठ गया। वहां के मूल निवासियों ने तो उसे पह
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Apr 14 min read
प्रेरणादायक संस्मरण
प्रेरणादायक संस्मरण स्वामी दर्शनानन्द जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन एक आदर्श सन्यासी के रूप में गुजरा। उनका परमेश्वर में अटूट विश्वास एवं दर्शन शास्त्रों के स्वाध्याय से उन्नत हुई तर्क शक्ति बड़ो बड़ो को उनका प्रशंसक बना लेती थी। संस्मरण उन दिनों का हैं जब स्वामी जी के मस्तिष्क में ज्वालापुर में गुरुकुल खोलने का प्रण हलचल मचा रहा था। एक दिन स्वामी जी हरिद्वार की गंगनहर के किनारे खेत में बैठे हुए गाजर खा रहे थे। किसान अपने खेत से गाजर उखाड़कर , पानी से धोकर बड़े प्रेम से खिला रहा था
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Apr 12 min read
'शहरी नक्सली' की परिभाषा
'शहरी नक्सली' की परिभाषा #डॉ_विवेक_आर्य वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने सरकार से 'शहरी नक्सली' शब्द को परिभाषित करने की मांग की है। कमाल देखिये अपने आपको बुद्धिजीवी कहने वाली और दशकों से सत्ता का समर्थन लेकर भारत के शिक्षा संस्थानों के पाठयक्रम को निर्धारित करने वाली रोमिला थापर 'शहरी नक्सली' की परिभाषा तक नहीं जानती। कोई बात नहीं हम उनके इस अज्ञान की पूर्ति कर देते हैं। 'शहरी नक्सली' वो है जो- 1. विश्वविद्यालयों में बीफ फेस्टिवल बनाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते है और अपने
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Apr 13 min read


#दिए_तले_अँधेरा
#डॉ_विवेक_आर्य एक ईसाई प्रचारक बड़े जोश में #पंजाब के देहात में जाकर प्रचार करने लगा। उसने सोचा की मसीह की शिक्षा को बढ़िया दिखाने के लिए हिन्दुओं के पुराणों की खिल्ली उड़ानी चाहिए जिससे की हिन्दू अपने ही पुराणों से घृणा करने लगे और मसीह की शिक्षा पर विश्वास लाये। मगर उसकी किस्मत ने उसे धोखा दिया और वह एक पेशावरी टोपी पहने #आर्यसमाजी प्रचारक से टकरा गया। पादरी- हिन्दुओं को पुराणों की शिक्षा को छोड़कर ईसा मसीह की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए देखो विष्णु, मत्सय, लिंग आदि पुराणों में क्
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Apr 14 min read
लोहारू का मुस्लिम नवाब और आर्यसमाज का संघर्ष
लोहारू का मुस्लिम नवाब और आर्यसमाज का संघर्ष (29 मार्च 1941 को लोहारू कांड के उपलक्ष पर प्रकाशित) #डॉ_विवेक_आर्य लोहारू 1947 से पहले एक मुस्लिम रियासत थी।पंजाब प्रांत में हिसार, शेखावाटी और बीकानेर से घिरा हुआ है छोटा सा नवाबी राज्य लोहारु। लोहारू की स्थापना अहमदबक्शखां ने 1803 में की थी। अंग्रेजों ने उन्हें यह रियासत जाट राजा भरतपुर के विरोध में सहायता करने के लिए दी थी। सन् 1935 के मध्य महीनों में तमाम जनता की निगाह में आ गया जबकि यहां के तेजस्वी किसानों ने नवाब की तानाशाही
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Mar 307 min read


आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम
आधुनिक इतिहास में शुद्धि समर्थक राष्ट्र नेताओं के नाम स्वामी दयानंद- सर्वप्रथम देहरादून में एक मुस्लमान को शुद्ध कर उनका अलखधारी नाम रख कर आधुनिक भारत में सदियों से बंद घर वापसी के द्वार को खोला स्वामी श्रद्धानन्द- लाखों मलकाने राजपूतों जो नौमुस्लिम कहलाते थे उन्हें शुद्ध किया और व्यवस्थित रूप से सकल हिन्दू समाज को संगठित करने का उद्घोष किया। शुद्धि चक्र को सार्थक रूप से अखिल भारतीय स्तर पर चलाया एवं अपना बलिदान भी दिया। पंडित लेखराम- सिंध से लेकर सम्पूर्ण पंजाब में जहाँ भी क
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Mar 282 min read
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